नमस्कार दोस्तों, आप सभी का हमारे नए आर्टिकल में स्वागत है। आज हम आपको देश की राजनीति और निर्वाचन आयोग से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर देने जा रहे हैं। यह खबर उन सभी लोगों के लिए दिलचस्प है, जो भारत की चुनावी प्रक्रिया, राजनीतिक दलों और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को समझना चाहते हैं। दोस्तों, जैसा कि आप जानते हैं, निर्वाचन आयोग देश में चुनाव कराने के साथ-साथ राजनीतिक दलों के पंजीकरण, उनके नियम-कायदों और पारदर्शिता की जिम्मेदारी निभाता है। समय-समय पर आयोग यह भी देखता है कि जो दल पंजीकृत हैं, वे सक्रिय भी हैं या नहीं। इसी क्रम में हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया गया है।
निर्वाचन आयोग ने 334 पंजीकृत लेकिन अप्रतिष्ठित (Unrecognised) राजनीतिक दलों को अपनी सूची से हटा दिया है। इसका कारण यह है कि इन दलों ने 2019 से लेकर अब तक पूरे छह साल में एक भी चुनाव नहीं लड़ा। यानी पंजीकृत होने के बावजूद इनकी कोई चुनावी भागीदारी नहीं रही। आप सभी को बताते चलें कि आयोग ने यह भी पाया कि इन दलों के कार्यालयों का कहीं भौतिक पता नहीं मिल रहा था। मतलब न तो ये दल जनता के बीच सक्रिय थे और न ही इनका कोई स्थायी ऑफिस था। ऐसे में आयोग ने इन दलों को निष्क्रिय मानते हुए सूची से बाहर कर दिया।
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यह 334 दल देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से थे। सफाई अभियान के बाद अब कुल 2,854 में से 2,520 पंजीकृत अप्रतिष्ठित दल ही बचे हैं। दोस्तों, वर्तमान में हमारे देश में 6 राष्ट्रीय दल और 67 राज्य स्तरीय दल सक्रिय हैं। राष्ट्रीय दलों में भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस (INC), बहुजन समाज पार्टी (BSP), भारत राष्ट्र समिति (BRS), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) शामिल हैं।
दोस्तों, यह कदम क्यों ज़रूरी था? देखिए, राजनीतिक दलों का पंजीकरण सिर्फ एक नाम या पहचान पाने के लिए नहीं होता, बल्कि इससे जुड़े कई अधिकार और सुविधाएं भी मिलती हैं, जैसे चुनाव चिह्न, टैक्स में छूट और दान पर लाभ। अगर कोई दल सक्रिय नहीं है और सिर्फ नाम के लिए पंजीकृत है, तो यह जनता के साथ-साथ चुनावी प्रणाली के लिए भी नुकसानदायक है।
निर्वाचन आयोग का यह कदम राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए बेहद अहम है।अब केवल वही दल बने रहेंगे जो वास्तव में जनता के बीच काम कर रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं।यदि आपके पास भी इस विषय से जुड़ी कोई जानकारी है या आपने किसी ऐसे दल का नाम सुना है जो अब निष्क्रिय हो चुका है, तो हमें ज़रूर बताएं। दोस्तों, ऐसे फैसले हमारे लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि केवल गंभीर और सक्रिय दल ही राजनीति में टिके रहें।



