नमस्कार दोस्तों, आप सभी का हमारे नए आर्टिकल में हार्दिक स्वागत है। दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसी बड़ी और अहम जानकारी देने जा रहे हैं, जो न केवल भारत के किसानों से जुड़ी है, बल्कि सीधे तौर पर भारत और अमेरिका जैसे दो बड़े देशों के रिश्तों पर भी असर डाल रही है। तो चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता आखिर क्यों बीच में ही रुक गई है और इसका हमारे देश के किसानों से क्या सीधा कनेक्शन है।
दोस्तों, भारत और अमेरिका के बीच बीते कुछ समय से व्यापार को लेकर बातचीत चल रही थी। लेकिन पांच दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका। इसकी सबसे बड़ी वजह बनी – किसानों के हितों की रक्षा। दरअसल, अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार में अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को आने दे, जबकि भारत इस बात के लिए तैयार नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% का भारी टैरिफ लगा दिया है और साफ-साफ कह दिया है कि जब तक ये मुद्दा हल नहीं होता, तब तक कोई और व्यापार वार्ता नहीं होगी।
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प्रधानमंत्री मोदी का साफ जवाब: “किसानों का भला पहले”
दोस्तों, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “हम अपने किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे, चाहे मुझे इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े।” दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं, भारत में किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है और देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा आज भी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में यदि विदेशी सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार में आ जाते हैं, तो हमारे देश के छोटे किसान बड़ी मुसीबत में आ सकते हैं।
अमेरिका की डिमांड क्या है?
आप सभी को बताते चलें कि अमेरिका चाहता है कि भारत उसके इन उत्पादों को अपने बाजार में एंट्री दे:
- मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन
- डेयरी प्रोडक्ट्स, पोल्ट्री, अंडा, मांस
- सेब, बादाम, अंगूर, संतरा, पेकन, फ्रेंच फ्राइज़
- चॉकलेट, कुकीज़, डिब्बाबंद फल और भी बहुत कुछ
इतना ही नहीं, अमेरिका अपने जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों जैसे GM मक्का, सोया, कैनोला और कपास को भी भारत में बेचना चाहता है। लेकिन भारत इन GM फसलों को अनुमति देने में काफी सतर्क है, क्योंकि इससे जुड़ी स्वास्थ्य और धार्मिक मान्यताएं भी हैं।
भारत की चिंता जायज़ है – किसानों को कैसे बचाएं?
भारत में औसतन हर किसान के पास सिर्फ 1.08 हेक्टेयर जमीन है, जबकि अमेरिका में यह करीब 187 हेक्टेयर है। अब सोचिए, एक तरफ अमेरिकी किसान जो मशीनों से खेती करता है और हजारों क्विंटल फसल पैदा करता है, और दूसरी तरफ हमारा किसान जो छोटे खेत में, गाय-भैंस के सहारे खेती करता है। क्या यह मुकाबला बराबरी का हो सकता है? भारत सरकार को डर है कि यदि अमेरिका को छूट दी गई, तो अमेरिकी सस्ते उत्पाद बाजार में भर जाएंगे और हमारे किसानों की फसलें कोई खरीदेगा ही नहीं। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
क्यों अड़े हैं अमेरिकी किसान?
दोस्तों, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में किसान सिर्फ खेती नहीं करते, बल्कि राजनीति में भी उनकी जबरदस्त पकड़ है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को भी 2016 और 2020 के चुनावों में भारी समर्थन मिला था किसानों से। ट्रंप ने खुद कहा था, “हमारे किसान अब मालामाल होने वाले हैं। हमारी व्यापार नीति उनके लिए शानदार साबित होगी।” इसलिए अमेरिका का पूरा जोर है कि उसके किसान जो फसलें ज्यादा पैदा कर रहे हैं, उन्हें भारत जैसे बड़े देश में बेचा जाए।
भारत के पास क्या विकल्प हैं?
भारत अभी डेयरी, मक्का, सोयाबीन, गेहूं जैसे उत्पादों पर कोई छूट देने को तैयार नहीं है, लेकिन अमेरिका के कुछ उत्पाद जैसे कि बादाम और सेब को लेकर थोड़ी नरमी दिखा सकता है। खबरों के अनुसार, भारत कुछ ऐसे GM आधारित प्रोडक्ट को इजाजत देने पर विचार कर सकता है जो पशु आहार (Animal Feed) के रूप में इस्तेमाल हों, जैसे – सोयाबीन मील या डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स, जो मक्का आधारित एथेनॉल से बनते हैं।
GTRI की चेतावनी: हो सकता है बड़ा नुकसान
Global Trade Research Initiative (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने साफ कहा है कि यदि भारत ने कृषि पर आयात शुल्क घटा दिए, तो अमेरिका जैसे देश अपने सब्सिडी वाले सस्ते अनाज भारत में भेज सकते हैं। और अगर कभी वैश्विक कीमतें गिरती हैं, तो भारत के किसान पूरी तरह टूट सकते हैं। उनका कहना है: “भारत को अपनी खाद्य सुरक्षा और किसानों की आमदनी के लिए नीतिगत आज़ादी बचाए रखनी चाहिए।”
निष्कर्ष – भारत को सोच-समझकर कदम उठाना होगा
दोस्तों, इस पूरी बहस का सार यही है कि अमेरिका अपने किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है, जबकि भारत अपने किसानों की सुरक्षा के लिए मजबूती से खड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। यदि आप भी किसी किसान परिवार से आते हैं, या कृषि से जुड़े हुए हैं, तो आपको यह मुद्दा जरूर जानना और समझना चाहिए।
आपकी राय क्या है?
यदि आपके अंदर भी इस आर्टिकल से जुड़ी कोई जानकारी या राय है, तो हमें कमेंट या ईमेल करके जरूर बताएं। क्या भारत को अमेरिकी दबाव के आगे झुकना चाहिए? या फिर अपने किसानों की सुरक्षा पहले रखनी चाहिए?



