नमस्कार दोस्तों, आप सभी का हमारे नए आर्टिकल में स्वागत है। दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। अभी RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5% की GDP ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा है, लेकिन इसके बावजूद देश की आर्थिक रफ्तार के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। इन चुनौतियों में पूंजी का बाहर जाना, निवेश में कमी, GDP की गति में सुस्ती और अलग-अलग सेक्टरों की मुश्किलें शामिल हैं।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि भले ही हाल के महीनों में वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम हुए हों, लेकिन वैश्विक व्यापार वार्ताओं से जुड़ी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। इस दौरान मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला लिया।
खतरा नंबर 1: विदेशी निवेशकों की निकासी
दोस्तों, जैसा कि आप जानते हैं, विदेशी निवेश (FII) किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जुलाई 2025 की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर ली है। इसकी बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दर का अंतर घट जाना और अमेरिका की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाने की आशंका है। आप सभी को बताते चलें कि 2025 में अब तक FII ने कुल 1.74 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
खतरा नंबर 2: रूसी तेल पर अमेरिकी नाराज़गी
दोस्तों, अमेरिका और रूस के बीच चल रहे तनाव का असर अब भारत पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि वे भारत पर 25% से ज्यादा टैरिफ लगा सकते हैं, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है। आपको बता दें कि 2021 में जहां भारत सिर्फ 3% तेल रूस से खरीदता था, वहीं अब यह हिस्सा 30% से ज्यादा हो चुका है। अगर भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना पड़ा, तो घरेलू तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और सस्ती रूसी आपूर्ति का फायदा खत्म हो जाएगा।
खतरा नंबर 3: ट्रंप टैरिफ का असर
दोस्तों, अगर अमेरिका भारत के निर्यात पर 25% शुल्क लगा देता है तो यह सीधे-सीधे हमारे व्यापार और GDP ग्रोथ पर असर डालेगा। वर्तमान में अमेरिका भारत के कुल निर्यात का लगभग 18% हिस्सा है और 2024 में हमारा अमेरिका के साथ 38 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष था। गहने-आभूषण, कपड़ा, स्मार्टफोन और मशीनरी जैसे कई उत्पादों में अमेरिका को निर्यात का हिस्सा 30%-40% तक है। ऐसे में ज्यादा टैरिफ लगने से इन क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ेगा, भले ही घरेलू मांग मजबूत बनी रहे।
खतरा नंबर 4: आईटी सेक्टर में छंटनी
दोस्तों, आप सभी जानते हैं कि आईटी सेक्टर पिछले दो दशकों से भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। लेकिन अब यह क्षेत्र भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। GenAI तकनीक और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। आपको बताते चलें कि हाल ही में TCS ने 12,000 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है, जिनमें ज्यादातर मिड और सीनियर लेवल के कर्मचारी हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो आईटी सेक्टर में नौकरी का संकट गहरा सकता है।
आखिर में…
दोस्तों, इन सारी चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। चालू खाते में अधिशेष, कम खुदरा महंगाई, स्थिर वैश्विक कमोडिटी कीमतें और घटता राजकोषीय घाटा हमारे पक्ष में हैं। अगर भविष्य में वैश्विक परिस्थितियां और खराब होती हैं, तो RBI के पास विकास को तेज करने के लिए ब्याज दरों में कटौती जैसे विकल्प मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का मजबूत पूंजी बाजार, बढ़ता उपभोक्ता आधार और प्रतिस्पर्धी कार्यबल हमें इन चुनौतियों से पार पाने में मदद करेगा।
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